पोलियो बच्चों में होने वाली मुख्य बीमारी है। भारत जैसे देशों में इस बीमारी का व्यापक प्रकोप देखने को मिलता है। यह बीमारी शिशुओं को ही अपना शिकार बनाती है। इस बीमारी के उन्मूलन के लिए व्यापक तौर पर प्रयास किए जा रहे हैं। 20 वीं सदी में यह बच्चों में होने वाली भयानक बीमारी के रुप में उभर कर सामने आई थी। यह बीमारी आधिकतर 1 से 2 साल की उम्र के बच्चों को होती है। पोलियो को पोलियोमेलाइटिस व शिशुओं का लकवा भी कहा जाता है। यह एक विषाणु से होने वाला भीषण संक्रामक रोग है। माना जाता है, यह रोग साधारणतय एक बच्चे से दूसरे बच्चे में संक्रमित भोजन के माध्यम से फैलता है।
यह विषाणु नाड़ी तंत्र पर प्रहार करता है और कुछ ही घण्टों के अन्दर पीडित बच्चे को पूर्ण पक्षाघात (लकवा) हो जाता है। यह वायरस हमारे शरीर में मुँह के रास्ते से भीतर पहुँचता है। यह आंत के अंदर बढ़ता है। इसके आरंभ में इस प्रकार के लक्षण देखे जा सकते हैं; जैसे साधारण फ्लू, बुखार, उल्टी, सिरदर्द, जोड़ों में दर्द व गर्दन में अकड़न इत्यादि। इस रोग में पीड़ित को पक्षाघात (लकवा) हो सकता है। एक प्रतिशत से कम मामलों में केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में घुस कर यह विषाणु अपना प्रकोप फैलाता है। यह सर्वप्रथम स्नायु को संक्रमित कर उसे समाप्त कर देता है। इसका प्रभाव यह पड़ता है की मांसपेशियों में कमजोरी आ जाती है और पीड़ित व्यक्ति तेज़ पक्षाघात (लकवा) का शिकार हो जाता है। पक्षाघात (लकवे) की तीव्रता इस बात पर निर्भर करती है की विषाणु ने किस-किस तंत्रिका को संक्रमित किया है। साधारणतय जो पोलियो देखा जाता है वह मेरुरज्जु का पोलियो होता है। इसमें पीड़ित असममित पक्षाघात (लकवा) का शिकार होता है और उसके पैर इसमें प्रभावित होते हैं।
इस बीमारी के विषाणु दूषित जल, मल-मूत्र, कफ़ व दूषित खाद्य पदार्थों में रहते हैं। मक्खियाँ इस बीमारी को एक स्थान से दूसरे स्थान में फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। गर्मी व वसंत में इस बीमारी का प्रकोप देखने को मिलता है।
वैज्ञानिकों ने पोलियो का पक्का इलाज ढूंढने में अभी तक सफलता प्राप्त नहीं की है। प्रतिरक्षण दवाओं के माध्यम से ही इस बीमारी की रोकथाम में सहायता ली जा रही है। पोलियो के वैक्सीन को बार-बार देकर बच्चों के अंदर संपूर्ण जीवन के लिए रक्षा प्रदान करने का प्रयास किया जा रहा है। सौ में से पाँच या छ: मामलों को छोड़ दिया जाए तो यह काफी हद तक कारगर साबित हुआ है। सिर्फ वही बच्चे इस बीमारी का शिकार होते हैं जो इस वैक्सीन के प्रति प्रतिक्रिया नहीं दिखा पाते, वह इस बीमारी से ग्रस्त हो जाते हैं।
कांग्रेस सरकार ने पोलियो के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए राष्ट्रीय स्तर पर इसके उन्मूलन के लिए प्रयास किए हैं। कांग्रेस सरकार पूरे भारत में मुफ्त पोलियो प्रतिरक्षण दवाएं वितरीत करके अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। हमारा संगठन 'नगर सुधार सभा' स्वयंसेवी संघठनो के साथ मिलकर समय-समय पर पोलियो उन्मूलन कैंप पूरे जिले में लगाती रहती है तथा पूर्ण रूप से यही प्रयास करती है के हर पाँच साल तक के बच्चो को समय पर पोलियो ड्राप उपलब्ध करवा दी जाये | इसके अतिरिक्त घर-घर जाकर भी पोलियो की दवा पिलाई जाती है।
उप्प-प्रधान जिला कांग्रेस कमिटी
पंचकुला
No comments:
Post a Comment