Sunday, April 28, 2013

जनता की समस्याओं के प्रति प्रशासन बेखबर : तरसेम गर्ग


नगर सुधार सभा पंचकूला के चेयरमैन तरसेम गर्ग ने शहर में मक्खी मच्छरों के लिए लोगों को सेक्टर व कॉलोनियों में गंदगी न फैलाने का आग्रह किया और कहा कि आप अपने मोहल्ले या घर के सामने कूड़ा-करकट या गंदगी न डालें। प्रशासन की तरफ से बनाए गए ड िपंग ग्राउंड या बिन में ही कूड़ा डालें, अक्सर देखने में आता है कि लोग कूड़ा-करकट बिन्स में न डालकर उसके आसपास ही फेंक देते हैं जिससे वह गंदगी सड़क पर फैल जाती है और खुद ही को नुकसान भुगतना पड़ता है। गर्मी के मौसम को देखते हुए आप अपने गमले व छतों पर रखे टूटे बर्तन और टायरों में पानी इकट्ठा न होने दें और कूलर के पानी को नियमित रूप से बदलते रहें जिससे बच्चे व बड़े डेंगू जैसी खतरनाक बीमारी की चपेट में न आएं। प्रशासन ने अभी तक मच्छरों से निजात दिलाने के लिए शहर में कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं। गर्ग ने बताया कि शहर में अभी से पार्कों, गलियों और घरों में मच्छरों की भरमार हो गई है इसलिए प्रशासन को जल्द से जल्द फोगिंग शुरू करा देनी चाहिए, न कि बीमारी के फैलने की प्रतीक्षा करे, लेकिन देखने में आता है कि प्रशासन इस ओर तब सक्रिय होता है जब बीमारी लोगों को चपेट में ले लेती है। साथ लगते यूटी चंडीगढ़ में जबकि प्रशासन ने बीमारियों की रोकथाम के लिए कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव और फोगिंग शुरू करा दी है, लेकिन अपने पंचकूला शहर में प्रशासन अभी तक मौन है।

नगर सुधार सभा पंचकूला के चेयरमैन तरसेम गर्ग ने शहर में आटोरिक्शा का किराया बढ़ाने के लिए सरकारी अधिकारियों की कमेटी का गठन किया गया है जो कि निर्णय लेगी कि शहर में किस जगह का कितना और मुनासिब किराया वसूला जाए। गर्ग ने कहा कि प्रशासन की ओर से गठित कमेटी में रोड से टी ऑर्गेनाइज़्ोशन का कोई भी सदस्य शामिल नहीं किया गया जबकि कम से कम तीन व्यक्ति रोड से टी ऑर्गेनाइज़्ोशन के शामिल किए जाएं ताकि वे भी जनता की ओर से अपने सुझाव दे सकें। अक्सर देखने में आया है कि रात्रि के समय ऑटोरिक्शा चालक अपनी मनमाना किराया वसूलते और दुव्र्यवहार करते हैं। ज्यादातर लोग रेलवे स्टेशन और जीरकपुर से पंचकूला का सफर करते हैं जहां पर सवारियों से तीन गुना किराया ऑटोरिक्शा चालक वसूलते हैं जिस पर प्रशासन की कोई लगाम नहीं है। इस कमेटी में जब तक कोई रोड से टी का कोई सदस्य शामिल नहीं किया जाएगा तब तक इस समस्या से पूरी तरह नहीं निपटा जा सकता।

गर्ग ने बताया कि गर्मी के मौसम में पानी की किल्लत को देखते हुए पालिका प्रशासन ने इस समस्या से निपटने के लिए कोई ठोस कदम अभी तक नहीं उठाए हैं। अक्सर देखने में यह भी आता है कि लोग बेवजह पानी की बर्बादी करते हैं, लोगों से भी अनुरोध है कि वे आवश्यकता अनुसार ही पानी को उपयोग में लाएं 'जल ही जीवन हैÓ की बात को ध्यान में रखते हुए बेवजह पानी की बर्बादी न करें, जल की एक-एक बूंद कीमती है। पालिका प्रशासन सर्वे करवाकर पाइपों की लीकेज की समस्या को जल्द से जल्द दूर कराए जिससे पानी की बर्बादी रोकी जा सके। शहर में ऐसी कई जगह हैं जहां पाइपों की लीकेज के कारण बेवजह पानी बर्बाद हो रहा है।

नगर सुधार सभा चेयरमैन ने कहा कि शहर में आगामी गर्मी के मौसम में बिजली की किल्लत फिर बढ़ेगी और लोगों को परेशानी झेलनी पड़ेगी। गर्ग ने बताया कि पिछले पांच सालों से प्रशासन को अवगत कराया जाता रहा है कि प्रशासन की तरफ से अब से बीस साल पहले जो ट्रांसफार्मर लगाए गए थे, आज बिजली की बढ़ती हुई खपत को देखते हुए इन पर लोड अत्यधिक बढ़ गया है जिसे झेल पाने में ये ट्रांसफार्मर सक्षम नहीं है। प्रशासन को सेक्टरों में नए ट्रांसफार्मर जल्दी से जल्दी लगवाने चाहिएं ताकि लोगों को गर्मी के मौसम में परेशानियों का सामना न करना पड़े। साथ ही लटकती और पेड़ों के बीच से गुजर रही तारों को जल्द ही ठीक करवाया जाए।

Monday, April 8, 2013

'दो बूंद जिंदगी की'


पोलियो बच्चों में होने वाली मुख्य बीमारी है। भारत जैसे देशों में इस बीमारी का व्यापक प्रकोप देखने को मिलता है। यह बीमारी शिशुओं को ही अपना शिकार बनाती है। इस बीमारी के उन्मूलन के लिए व्यापक तौर पर प्रयास किए जा रहे हैं। 20 वीं सदी में यह बच्चों में होने वाली भयानक बीमारी के रुप में उभर कर सामने आई थी। यह बीमारी आधिकतर 1 से 2 साल की उम्र के बच्चों को होती है। पोलियो को पोलियोमेलाइटिस व शिशुओं का लकवा भी कहा जाता है। यह एक विषाणु से होने वाला भीषण संक्रामक रोग है। माना जाता है, यह रोग साधारणतय एक बच्चे से दूसरे बच्चे में संक्रमित भोजन के माध्यम से फैलता है।

यह विषाणु नाड़ी तंत्र पर प्रहार करता है और कुछ ही घण्टों के अन्दर पीडित बच्चे को पूर्ण पक्षाघात (लकवा) हो जाता है। यह वायरस हमारे शरीर में मुँह के रास्ते से भीतर पहुँचता है। यह आंत के अंदर बढ़ता है। इसके आरंभ में इस प्रकार के लक्षण देखे जा सकते हैं; जैसे साधारण फ्लू, बुखार, उल्टी, सिरदर्द, जोड़ों में दर्द व गर्दन में अकड़न इत्यादि। इस रोग में पीड़ित को पक्षाघात (लकवा) हो सकता है। एक प्रतिशत से कम मामलों में केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में घुस कर यह विषाणु अपना प्रकोप फैलाता है। यह सर्वप्रथम स्नायु को संक्रमित कर उसे समाप्त कर देता है। इसका प्रभाव यह पड़ता है की मांसपेशियों में कमजोरी आ जाती है और पीड़ित व्यक्ति तेज़ पक्षाघात (लकवा) का शिकार हो जाता है। पक्षाघात (लकवे) की तीव्रता इस बात पर निर्भर करती है की विषाणु ने किस-किस तंत्रिका को संक्रमित किया है। साधारणतय जो पोलियो देखा जाता है वह मेरुरज्जु का पोलियो होता है। इसमें पीड़ित असममित पक्षाघात (लकवा) का शिकार होता है और उसके पैर इसमें प्रभावित होते हैं।
इस बीमारी के विषाणु दूषित जल, मल-मूत्र, कफ़ व दूषित खाद्य पदार्थों में रहते हैं। मक्खियाँ इस बीमारी को एक स्थान से दूसरे स्थान में फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। गर्मी व वसंत में इस बीमारी का प्रकोप देखने को मिलता है।

वैज्ञानिकों ने पोलियो का पक्का इलाज ढूंढने में अभी तक सफलता प्राप्त नहीं की है। प्रतिरक्षण दवाओं के माध्यम से ही इस बीमारी की रोकथाम में सहायता ली जा रही है। पोलियो के वैक्सीन को बार-बार देकर बच्चों के अंदर संपूर्ण जीवन के लिए रक्षा प्रदान करने का प्रयास किया जा रहा है। सौ में से पाँच या छ: मामलों को छोड़ दिया जाए तो यह काफी हद तक कारगर साबित हुआ है। सिर्फ वही बच्चे इस बीमारी का शिकार होते हैं जो इस वैक्सीन के प्रति प्रतिक्रिया नहीं दिखा पाते, वह इस बीमारी से ग्रस्त हो जाते हैं।

कांग्रेस सरकार ने पोलियो के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए राष्ट्रीय स्तर पर इसके उन्मूलन के लिए प्रयास किए हैं। कांग्रेस सरकार पूरे भारत में मुफ्त पोलियो प्रतिरक्षण दवाएं वितरीत करके अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। हमारा संगठन 'नगर सुधार सभा' स्वयंसेवी संघठनो के साथ मिलकर समय-समय पर पोलियो उन्मूलन कैंप पूरे जिले में लगाती रहती है तथा पूर्ण रूप से यही प्रयास करती है के हर पाँच साल तक के बच्चो को समय पर पोलियो ड्राप उपलब्ध करवा दी जाये | इसके अतिरिक्त घर-घर जाकर भी पोलियो की दवा पिलाई जाती है।



उप्प-प्रधान जिला कांग्रेस कमिटी
पंचकुला